पहलगाम में हुए आतंकी हमले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बयान सुनकर गुस्सा तो आता ही है, साथ में उनकी बौखलाहट और साजिश की बू भी आती है। आसिफ साहब कहते हैं कि पहलगाम में पर्यटकों पर हुआ हमला भारत में “बगावतों” का नतीजा है –नगालैंड, मणिपुर, छत्तीसगढ़, कश्मीर में युद्ध लड़े जा रहे हैं! अरे, ये क्या बकवास है?
अपने घर में आतंकियों को पनाह देने वाले, उन्हें हथियार और पैसे देने वाले, और अब भारत को लेक्चर दे रहे हैं? ये वही पाकिस्तान है, जो उरी, पुलवामा, और 26/11 मुंबई हमले में दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका है। खासकर मुंबई हमले में जिंदा पकड़े गए आतंकी अजमल कसाब के बयान के बाद तो आसिफ साहब को शर्म आनी चाहिए थी।
अब तो अमेरिका की जेल में 35 साल की सजा में बंद मुंबई हमले के मास्टरमाइंड डेविड कोलमैन हेडली का साथी रहा ताहव्वुर राणा को भी अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया जा चुका है। एनआईए उससे पूछताछ कर रही है, जल्द ही 26/11 की सच्चाई दुनिया के सामने आ जाएगी। दुनिया ये जान जाएगी, कैसे लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान की आईएसआई ने मिलकर उस हमले को अंजाम दिया था। यहीं डर पाकिस्तान को परेशान कर रहा है।
पाकिस्तान को लगता है कि पहलगाम जैसे हमले करके वो दुनिया का ध्यान अपनी करतूतों से हटा सकता है। वो इसे भारत के खिलाफ “युद्ध” या “आजादी की लड़ाई” का नाम देना चाहता है। लेकिन, सीमा पार आतंकी फैक्ट्री चलाने की पाकिस्तान की हकीकत अब छिपी नहीं है। दुनिया का ध्यान भटकाने की पाकिस्तान की ये कोशिश सिर्फ कश्मीर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा भारत के पड़ोसी देश चीन और बंग्लादेश तक फैला हुआ है।
पाकिस्तान एक तरफ वो कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों को हथियार और पैसे देकर आग लगाता है। दूसरी तरफ, बांग्लादेश सीमा से आतंकी मुर्शिदाबाद जैसे इलाकों में घुसकर हिंसा फैलाते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। तीसरी तरफ, चीन LAC पर चालबाजियाँ करता है और पाकिस्तान को शह देता है। अब तो खालिस्तानी आतंकवाद का मसला भी सामने है।
पाकिस्तान लंबे समय से खालिस्तानी आतंकियों को पनाह देता रहा है, और उनकी हरकतें भारत के खिलाफ साजिश का हिस्सा बनती रही है। हाल में खालिस्तानी आतंकियों के खिलाफ वैश्विक कार्रवाइयाँ शुरू हुई हैं, जिससे पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ रही हैं। ये सारी घटनाएँ बताती हैं कि भारत को तीन तरफ से कमजोर करने की कोशिश हो रही है, और पहलगाम हमला उसी साजिश का हिस्सा हो सकता है।
दुनिया भी पाकिस्तान का ये ड्रामा समझ चुकी है। अमेरिका, रूस, फ्रांस, और संयुक्त राष्ट्र ने पहलगाम हमले की निंदा की और भारत के साथ खड़े हैं। तुर्की और चीन को छोड़कर, पाकिस्तान को कहीं से सहारा नहीं मिल रहा। फिर भी, वो अपनी पुरानी चाल चल रहा है – आतंक को “आजादी” का जामा पहनाना। लेकिन, पर्यटकों पर हमला करके उसने अपनी औकात दिखा दी।
दुनिया को पाकिस्तान से पूछना चाहिए, कौन सी “आजादी” मासूमों की जान लेती है? अब कश्मीर की जनता गुस्से में है – वो सड़कों पर निकलकर पाकिस्तान और उसके समर्थित आतंकियों के खिलाफ नारे लगा रही है। कश्मीरी लोग साफ कह रहे हैं – हमें शांति और तरक्की चाहिए, न कि आतंक का वो जहर जो पाकिस्तान परोस रहा है। देश कह रहा है, पहलगाम के शहीदों का खून यूं ही व्यर्थ नहीं जाएगा। जरूरत पड़ी तो हमारी फौज की ताकत सीमा पार से होने साजिशों को धूल चटाएगी।